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हाईकोर्ट ने ठाकर सिंह भरमौरी को सभी आरोपों से किया बरी, पीएम पर टिप्पणी केस में नहीं मिले सबूत, कोर्ट ने खत्म की कार्रवाई

➤ हाईकोर्ट ने ठाकर सिंह भरमौरी को सभी आरोपों से किया बरी
➤ पीएम पर अभद्र भाषा मामले में नहीं मिले ठोस सबूत
➤ कोर्ट बोला- विश्वसनीय साक्ष्य के बिना कार्रवाई जारी रखना उचित नहीं



हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता ठाकर सिंह भरमौरी को प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल से जुड़े मामले में बड़ी राहत देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया है। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने स्पष्ट कहा कि इस मामले में ऐसा कोई विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी ने जानबूझकर प्रधानमंत्री का अपमान किया या सार्वजनिक शांति भंग करने की मंशा से कोई टिप्पणी की।

यह मामला वर्ष 2021 का है, जब भरमौरी के खिलाफ चुनावी भाषण के दौरान कथित अभद्र भाषा के प्रयोग को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस थाना भरमौर में एफआईआर दर्ज की गई थी और आरोप लगाए गए थे कि उन्होंने आचार संहिता, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 और भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन किया है।

हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि जांच एजेंसियां आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस और स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकीं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि इस मामले को आगे बढ़ाया जाता, तो यह याचिकाकर्ता के लिए अनावश्यक परेशानी और एक लंबी कानूनी प्रक्रिया का कारण बनता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई संकेत नहीं है कि भरमौरी की कथित टिप्पणियों के कारण सार्वजनिक शांति भंग हुई हो या किसी प्रकार का उकसावा पैदा हुआ हो। ऐसे में केवल आरोपों के आधार पर मुकदमा चलाना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

इस फैसले के साथ ही अदालत ने संबंधित एफआईआर और सभी कानूनी कार्यवाही को रद्द कर दिया, जिससे कांग्रेस नेता को बड़ी कानूनी राहत मिली है। इस निर्णय को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और साक्ष्य-आधारित न्याय प्रक्रिया के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।